Chapter 2- Do Goraya
1. पाठ से
(क) दोनोों गौरै योों को पपताजी जब घर से बाहर पनकालने की कोपिि कर रहे थे तो मााँ क्ोों मदद
नही ों कर रही थी? बस, वह हाँ सती क्ोों जा रही थी?
उत्तर: म ाँ पित जी क मज क उड रही थी क्योंपक पित जी कभी त ली बज कर तय कभी श-शू करके
गौरै ययों कय उड रहे थे। गौरै य घयोंसले से पसर पिक ल कर झ ाँ कती चीों-चीों करती पिर घयसले में व िस
चली ज ती। यह दे खकर म ाँ हाँ सिे लगती है । म ाँ ये िहीों च हती थी पक गयरै य घर से ब हर ज ये क्योंपक
म ाँ कय ित थ पक उन्योंिे अििे अोंडे दे पदए हयोंगे और वे अििे बच्यों कय छयडकर िहीों ज सकती।
(ख) दे खो जी, पिप़ियोों को मत पनकालो। मााँ ने पपताजी से गोंभीरता से यह क्ोों कहा?
उत्तर: म ाँ िे ऐस इसपलए कह क्योंपक पचपडययों िे अिि घयोंसल बि पलय थ तथ उसिे अोंडे भी दे पदए
थे। यपद पित जी पचपडय कय पिक ल दे ते तय वे अििे बच्यों से पबछड ज ते तथ ये पबछडिे क ददद केवल
म ाँ ही ज िती हैं ।
(ग). "पकसी को सिमुि बाहर पनकालना हो तो उसका घर तो़ि दे ना िापहए," पपताजी ने गुस्से में
ऐसा क्ोों कहा? क्ा पपताजी के इस कथन से मााँ सहमत थी? क्ा तुम सहमत हो? अगर नही ों तो
क्ोों?
उत्तर: पचपडययों के लग त र शयर मच िे व पतिके पगरिे के क रण पित जी िे यह कह । पित जी के इस
कथि से म ाँ पबल्कुल भी सहमत िहीों थी और हम भी सहमत िहीों है क्योंपक क् ित उसे अोंडे हय जय पक
घयसल हट िे से िुट ज ए और िन्ी पचपडय ाँ मर ज ये।
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, (घ) कमरे में पिर से िोर होने पर भी पपताजी अबकी बार गौरै या की तरफ़ दे खकर मुसकुराते
क्ोों रहे ?
उत्तर: जब पित जी घयोंसले कय तयड रहे थे, तभी उसमें से चीों-चीों की आव ज आई तथ उसमें रखे अोंडयों
में से बच्े पिकल आए थे, तभी पित जी िे घयोंसल व िस रख पदय क्योंपक पित जी कय बच्यों कय दे खकर
दय आ गई। अब पित जी िीचे उतर आए इसके ब द पचपडय द िे ल कर अििे बच्यों कय खखल िे लगी।
यह दे खकर पित जी मु स्कुर रहे थे क्योंपक अब उन्ें ित चल गय थ पक बच्े हयिे के थयडे पदियों ब द वे
बच्यों कय ले कर अििे आि ही चली ज एाँ गी।
2. पिु-पक्षी और हम
5. इस कहानी के िुरू में कई पिु-पपक्षयोों की ििाा की गई है। कहानी में वे ऐसे कुछ काम करते
हैं जैसे मनुष्य करते हैं। उनको ढाँ ढ़कर तापलका परी करो:
(क) पक्षी – घर का पता पलखवाकर लाए हैं।
(ख) बढ़ा िहा –
(ग) पबल्ली –
(घ) िमगाद़ि –
(ङ) िी ोंपियााँ –
उत्तर: (क) िक्षी – घर क ित पलखव कर ल ए हैं ।
(ख) बू ढ चू ह –अोंगीठी के िीछे बै ठत है श यद सदी लग रही है ।
(ग) पबल्ली – पिर आऊाँगी कह कर चली ज ती है ।
(घ) चमग दड – िों ख िौज ही छ विी ड ले हुए हैं ।
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