Written by students who passed Immediately available after payment Read online or as PDF Wrong document? Swap it for free 4.6 TrustPilot
logo-home
Class notes

CH -2 राजा किसान और नगर कक्षा 12वीं (इतिहास)

Rating
-
Sold
-
Pages
7
Uploaded on
14-04-2026
Written in
2025/2026

यह कक्षा 12 इतिहास अध्याय 2 राजा किसान और नगर के आसान, साफ और परीक्षा उपयोगी नोट्स हैं। इन नोट्स में महत्वपूर्ण प्रश्न, सरल व्याख्या, शॉर्ट नोट्स और रिवीजन सामग्री शामिल है। बोर्ड परीक्षा की तैयारी के लिए बेहतरीन नोट्स

Institution
Course

Content preview

हड़प्पा सभ्यता िे बाद भारतीय उपमहाद्वीप में कििास
 हड़प्पा सभ्यता के पतन के बाद अगले लगभग 1,500 वर्षों में भारत और उसके आस-पास के क्षेत्रों में कई बड़े पररवततन हुए।
 इसी काल में ससोंधु नदी और उसकी सहायक नसदयरों के आसपास रहने वाले लरगरों द्वारा ऋग्वेद की रचना की गई।
 उत्तर भारत, दक्कन पठार और कनातटक के कुछ क्षेत्रों में कृसर्ष आधाररत बस्तियााँ सवकससत हरने लगीों।
 ईसा पूवत पहली सहस्राब्दी के समय मध्य और दसक्षण भारत में मृतकरों के अोंसतम सोंस्कार के नए तरीके शुरू हुए।
 इस समय प्रारों सभक राज्रों, राज्रों और साम्राज्रों का उदय हुआ।
स्रोत
 असभलेख
 ग्रोंथ
 ससक्के
 सचत्
भारतीय अकभलेख किज्ञान में जेम्स करिंसेप िा योगदान
 भारतीय असभलेख सवज्ञान में 1830 के दशक में बड़ी प्रगसत हुई।
 यह प्रगसत ईस्ट इिं किया ििंपनी िे अकििारी जेम्स करिंसेप द्वारा की गई।
 उन्रोंने दर प्राचीन सलसपयरों — ब्राह्मी और खरोष्ठी — कर पढ़ने में सफलता प्राप्त की।
 इन कलकपयोिं िा रयोग भारत के सबसे आरिं कभि किलालेखोिं और कसक्ोिं में सकया गया था।
 अने क सशलालेखरों में कपयदस्सी नामक राजा का उल्लेख समलता है, सजसका अथत है मनोहर मुखािृकत िाला।
 सप्रोंसेप ने सपयदस्सी की पहचान बौद्ध ग्रोंथरों में वसणतत सम्राट अशरक से की।
 इस खरज ने प्रारों सभक भारत के राजनीसतक इसतहास के अध्ययन की सदशा कर पूरी तरह बदल सदया।
अकभलेख
 असभलेख उन्ें कहते हैं जर पत्थर, धातु या समट्टी के बततन जैसी कठरर सतह पर खु दे हरते हैं।
 इनमें इन्ें बनवाने वाले लरगरों की उपलस्तियरों, गसतसवसधयरों या सवचाररों का सववरण समलता है।
 सबसे प्रारों सभक असभलेख रािृत भाषा में सलखे गए थे।
 अकभलेखिास्त्र (Epigraphy) — असभलेखरों के अध्ययन कर असभलेखशास्त्र कहते हैं।
 अकभलेखिास्त्री (Epigraphist) — वे सवद्वान या लरग जर असभलेखरों का अध्ययन करते हैं।
छठी िताब्दी ईसा-पूिव िो रारिं कभि भारतीय इकतहास में एि महत्वपूर्व पररितवनिारी िाल क्ोिं माना जाता है ?
I. छठी शताब्दी ईसा-पूवत कर भारतीय इसतहास में महत्वपूणत काल माना जाता है क्रोंसक इसी समय भारतीय उपमहाद्वीप में रारिं कभि राज्ोिं
और नगरोिं िा उदय हुआ था।
II. इस समय लोहे िा व्यापि उपयोग कृसर्ष और युद्ध में हरने लगा। लरहे की कुल्हासड़यरों से जोंगल साफ सकए गए, सजससे कृसर्ष का सविार
हुआ तथा जनसोंख्या वृस्तद्ध और नगरीकरण कर बढ़ावा समला।
III. इसी काल में आहत कसक्ोिं िा रचलन हुआ, सजससे व्यापार सरल हुआ और मगध तथा करशल जैसे राज्रों की अथतव्यवस्था मजबूत
हुई।
IV. इस समय बौद्ध िमव और जैन िमव जैसे नए धमों का उदय हुआ।
V. इसी काल में 16 महाजनपदोिं िा उदय हुआ, जैसे— वस्ति, मगध, करशल, कुरु, पाों चाल और गाोंधार।
VI. इस समय ब्राह्मणरों ने सोंस्कृत भार्षा में िमवसूत्र और िमविास्त्रोिं िी रचना की।
जनपद
 जनपद शब्द का अथत हरता है वह भूसम जहााँ एक कुल, गरत् या जनजासत के लरग रहते हर।
 इस शब्द का प्रयरग सरों कृत और प्रकृत दरनरों में समलता है।
 जनपद शब्द का प्रयरग प्राकृत और सोंस्कृत दरनरों भार्षाओों में सकया गया है।
महाजनपद
 वह क्षेत् जहााँ एक से असधक कबीले या जनजासतयााँ आकर बसती थीों, महाजनपद कहलाता था।
 ऐसे 16 प्रमुख महाजनपद थे।
 महाजनपद सामान्य जनपदरों की तुलना में असधक शस्तिशाली और बड़े थे।
 महाजनपदोिं िी कििेषताएँ
 प्रत्ये क महाजनपद की एक राजधानी हरती थी, जर प्रायः सकलेबोंद हरती थी।
 प्रत्ये क महाजनपद पर राजाओों का शासन हरता था।
 प्रत्ये क महाजनपद के पास सेना और नौकरशाही हरती थी।
 महाजनपदोिं िी आय िे स्रोत
 प्रजा पर कर लगाकर
 सकसानरों, व्यापाररयरों और कारीगररों से प्राप्त उपहार
 पड़रसी राज्र पर आक्रमण करके

,  ओलीगािी या समूहिासन - ओलीगाकी या समूहशासन उसे कहते हैं जहााँ सत्ता पुरुर्षरों के एक समूह के हाथ में हरती है और इस समूह
के प्रत्ये क सदस्य कर राजा कहा जाता है।
मगि सबसे िक्तििाली महाजनपद िैसे बना ?
I. उपजाऊ भू कम — मगध का क्षेत् अत्योंत उपजाऊ था, सजससे फसलें आसानी से उगती थीों। इससे राज् कर पयात प्त भरजन समला और वह
बड़ी जनसोंख्या तथा मजबूत सेना का पालन-परर्षण कर सका।
II. गिं गा और सोन नकदयाँ — इन नसदयरों से कृसर्ष के सलए पानी समला। साथ ही ये नसदयााँ व्यापार, यातायात और सोंचार के प्राकृसतक मागत थीों,
सजससे व्यापार तेज और आसान हुआ। युद्ध के समय भी नसदयााँ पररवहन में सहायक रहीों।
III. लोहे िी खदानें — मगध के पास लरहे के भोंडार थे। लरहे से मजबूत हसथयार (तलवारें , तीर) और कृसर्ष उपकरण (हल) बनाए गए। इससे
सेना असधक शस्तिशाली हुई और कृसर्ष उत्पादन बढ़ा।
IV. किलेबिंद राजिानी — मगध की राजधासनयााँ प्रमुख व्यापार मागों पर स्तस्थत थीों, सजससे व्यापारी बड़ी सोंख्या में आए और राज् की सोंपन्नता
बढ़ी। इसकी पहली राजधानी राजगाह ( राजा िा कनिास ) पहासड़यरों से सिरी हुई थी, सजससे प्राकृसतक सुरक्षा समलती थी। बाद में राजा
उदयन ने राजधानी पाटकलपुत्र में स्थानाों तररत की, जर नसदयरों के बीच स्तस्थत थी और सुरक्षा, व्यापार तथा सोंपकत के सलए असधक लाभकारी
थी।
V. िैिाकहि सिं बिंि — मगध के शासकरों ने अन्य शस्तिशाली राज्रों से वैवासहक सोंबोंध स्थासपत सकए, सजससे उनकी शस्ति और राजनीसतक
समथतन बढ़ा।
VI. सिि और महत्वािािंक्षी िासि — सबोंसबसार और अजातसत्तु जैसे यरग्य और महत्वाकाों क्षी राजाओों के कारण मगध शस्तिशाली बना।
वे कुशल कूटनीसतज्ञ और युद्धनीसत में सनपुण थे। उन्रोंने रणनीसतक गठबोंधन बनाए और नए सैन्य तरीकरों कर अपनाया।
VII. िन सिंसािन और हाकियोिं िी से ना— वनरों से लकड़ी समली, सजसका उपयरग सकलरों, िररों और हसथयाररों के सनमात ण में हुआ। वनरों में पाए
जाने वाले हासथयरों कर युद्ध के सलए प्रसशसक्षत सकया गया, सजससे मगध की सेना और असधक शस्तिशाली बनी।
VIII. मजबूत स्िायी से ना — मगध के पास एक स्थायी और सोंगसठत सेना थी, जर राज् की रक्षा करने और अन्य क्षेत्रों पर सवजय प्राप्त करने के
सलए सदै व तैयार रहती थी।
मौयव साम्राज्
 मौयत साम्राज् की स्थापना चिंद्रगुप्त मौयव ने लगभग 321 ईसा पूिव में की थी।
 इस साम्राज् का सविार उत्तर-पसिम सदशा में हुआ, सजसमें अफगासनिान और बलूसचिान भी शासमल थे।
 बाद में उनके पौत् अिोि, जर प्राचीन भारत के सबसे प्रससद्ध शासकरों में से एक थे, ने िकलिंग ( उड़ीसा ) पर सवजय प्राप्त की।
मौयव साम्राज् िे स्रोत
 मौयत साम्राज् की जानकारी के प्रमुख स्ररत -
 साकहक्तिि स्रोत -
I. अिविास्त्र – यह चार्क् (कौसटल्य) द्वारा सलखा गया ग्रोंथ है। इसमें राजनीसत, शासन-प्रणाली और साम्राज् की आसथतक स्तस्थसत का वणतन
समलता है।
II. इिं कििा – यह यूनानी राजदू त मेगस्िनीज द्वारा सलखा गया ग्रोंथ है, जर सेल्युकस सनकेटर द्वारा चोंद्रगुप्त मौयत के दरबार में भेजा गया था।
इसमें मौयत प्रशासन का सववरण समलता है।
III. बौद्ध ग्रिं ि – बौद्ध ग्रोंथ जैसे जातक कहासनयरों से हमे, मौयत सम्राज् की सामासजक आसथतक स्तस्थती का पता चलता है। महावहाों तथा दीपवोंथ
द्वारा हमे बुद्ध धमत के प्रचार में सम्राट असरक के यरगदान का पता चलता है।
 पुराताक्तत्वि स्रोत -
I. असोि िे किलालेख – असरक पहले सम्राट थे सजन्रोंने अपने सोंदेशरों कर प्राकृसतक पत्थररों और पॉसलश सकए गए िोंभरों पर सलखवाया था।
इन सशलालेखरों के माध्यम से उन्रोंने जनता तक अपने सोंदेश, सवशेर्षकर धम्म के ससद्धाोंतरों कर पहुाँचाने का प्रयास सकया.
II. भौकति अििेष – भौसतक अवशेर्ष जैसे मूसततयरों और ससवकर से भी हमे मौयत साम्राज् की जानकारी समलती है.
 इस प्रकार, दरनरों प्रकार के स्ररत मौयत साम्राज् की राजनीसत, प्रशासन, समाज, अथतव्यवस्था और सोंस्कृसत के बारे में महत्वपूणत जानकारी
प्रदान करते हैं।
 असरक पहले शासक थे सजन्रोंने अपने सोंदेश जनता और असधकाररयरों के सलए पत्थररों पर अोंसकत करवाए—चाहे वे प्राकृसतक चट्टानें हरों या
पॉसलश गए िोंभ।
सम्राट असोि िे िम्म िे कसद्धािंत
 कसलोंग युद्ध (261 ईसा पूवत) के बाद असरक जनसोंहार और सवनाश कर दे खकर अत्योंत व्यसथत हर गए।
 उन्रोंने युद्ध का त्याग कर धम्म कर अपनाया, जर नैसतक मूल्यरों पर आधाररत नीसत थी, तासक अपने साम्राज् में शाों सत और सद्भाव बनाए रख
सकें।
 िम्म िे कसद्धािंत
I. बड़ोिं िा सम्मान – समाज के वररष्ठ सदस्यरों का आदर और आज्ञा का पालन करना चासहए।
II. ब्राह्मर्ोिं और कभक्षुओ िं िी से िा – धासमतक व्यस्तियरों और सवद्वानरों कर दान और सहायता दे नी चासहए।
III. राजा और अकििाररयोिं िा सम्मान – नागररकरों कर शासन व्यवस्था के प्रसत सनष्ठा और सम्मान सदखाना चासहए।
IV. अकहिंसा – मनुष्रों और पशुओों की हत्या से बचना चासहए तथा युद्ध के स्थान पर शाों सत का मागत अपनाना चासहए।
V. सििाकदता – हमेशा सत्य बरलना एवों सत्य की राह पर चलना।
VI. माता-कपता और गु रुओिं िी आज्ञा िा पालन – उनका सम्मान करें और उनके मागतदशतन का अनु सरण करें ।
VII. िाकमवि सकहष्णुता – सभी धमों का सम्मान करें और दू सररों की मान्यताओों की सनों दा न करें ।
VIII. इच्छाओिं पर कनयिंत्रर् – लरभ, क्ररध, ईष्ात , अहोंकार और सवलाससता कर कम करें ।
IX. दयालुता और लोि-िल्यार् – गरीबरों की सहायता करें , करुणाशील बनें और जनकल्याण के कायत करें ।
X. सदाचार – क्रूरता, कठरर व्यवहार और अनै सतक कायों से दू र रहें।

Written for

Institution
Secondary school
School year
5

Document information

Uploaded on
April 14, 2026
Number of pages
7
Written in
2025/2026
Type
Class notes
Professor(s)
Sachin
Contains
All classes

Subjects

$7.99
Get access to the full document:

Wrong document? Swap it for free Within 14 days of purchase and before downloading, you can choose a different document. You can simply spend the amount again.
Written by students who passed
Immediately available after payment
Read online or as PDF

Get to know the seller
Seller avatar
kt600652

Get to know the seller

Seller avatar
kt600652
Follow You need to be logged in order to follow users or courses
Sold
-
Member since
1 month
Number of followers
0
Documents
10
Last sold
-

0.0

0 reviews

5
0
4
0
3
0
2
0
1
0

Recently viewed by you

Why students choose Stuvia

Created by fellow students, verified by reviews

Quality you can trust: written by students who passed their tests and reviewed by others who've used these notes.

Didn't get what you expected? Choose another document

No worries! You can instantly pick a different document that better fits what you're looking for.

Pay as you like, start learning right away

No subscription, no commitments. Pay the way you're used to via credit card and download your PDF document instantly.

Student with book image

“Bought, downloaded, and aced it. It really can be that simple.”

Alisha Student

Working on your references?

Create accurate citations in APA, MLA and Harvard with our free citation generator.

Working on your references?

Frequently asked questions