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सत्ता की साझेदारी



परिचय
इस अध्याय के साथ हम लोकतंत्र की उस यात्रा को आगे बढ़ाएँगे जो पिछले
साल शरू ु हुई थी। पिछले साल हमने देखा था कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सारी



अध्याय 1
ताकत किसी एक अगं तक सीमित नहीं होती। विधायिका, कार्यपालिका और
न्यायपालिका के बीच परू ी समझ के साथ सत्ता को विकें द्रित कर देना लोकतंत्र के
कामकाज के लिए बहुत ज़रूरी है। पहले तीन अध्यायों में हम सत्ता के बँटवारे पर
सोच-विचार को आगे बढ़ाएँगे। आइए, हम बेल्जियम और श्रीलंका की दो कथाओ ं
के साथ शरुु आत करते हैं। ये दोनों घटनाएँ बताती हैं कि विभिन्न लोकतांत्रिक
शासन पद्धतियाँ सत्ता के बँटवारे की माँग से किस तरह निपटती हैं। इन घटनाओ ं
से यह समझने में कुछ मदद मिलेगी कि आखिर लोकतंत्र में सत्ता के बँटवारे की
ज़रूरत क्यों होती है। इससे हम सत्ता के बँटवारे के उन रूपों पर बातचीत कर
सकें गे जिनकी चर्चा अगले दो अध्यायों में की गई है।
सत्ता की साझेदारी




1
Reprint 2026-27

, बेल्जियम और श्रीलंका
बेल्जियम यरू ोप का एक छोटा-सा देश है, डच बोलने वाले समहू ों के बीच तनाव बढ़ने
क्षेत्रफल में हमारे हरियाणा राज्य से भी छोटा। लगा। इन दोनों समदु ायों के टकराव का सबसे
इसकी सीमाएँ फ्रांस, नीदरलैंड, जर्मनी और तीखा रूप ब्सरू ल्स
े में दिखा। यह एक विशेष
लक्समबर्ग से लगती हैं। इसकी आबादी एक तरह की समस्या थी। डच बोलने वाले लोग
करोड़ से थोड़ी अधिक है यानी हरियाणा की सखं ्या के हिसाब से अपेक्षाकृ त ज़्यादा थे
आबादी से करीब आधी। इस छोटे से देश के लेकिन धन और समृद्धि के मामले में कमज़ोर
मेरे दिमाग में सीधा सा
समाज की जातीय बनु ावट बहुत जटिल है। और अल्पमत में थे।
समीकरण यह है कि सत्ता का देश की कुल आबादी का 59 फ़ीसदी हिस्सा आइए, इस स्थिति की तल ु ना एक और
बँटवारा = फ्लेमिश इलाके में रहता है और डच बोलता देश से करें । श्रीलंका एक द्वीपीय देश है जो
सत्ता के टुकड़े करना = है। शेष 40 फ़ीसदी लोग वेलोनिया क्षेत्र में तमिलनाडु के दक्षिणी तट से कुछ किलोमीटर
देश को कमज़ोर करना। हम रहते हैं और फ़्रें च बोलते हैं। शेष एक फ़ीसदी की दरू ी पर स्थित है। इसकी आबादी करीब
इस बात से शरुु आत क्यों कर लोग जर्मन बोलते हैं। राजधानी ब्सरू ल्स
े के 80 दो करोड़ है यानी हरियाणा के बराबर। दक्षिण
रहे हैं? फ़ीसदी लोग फ़्रें च बोलते हैं और 20 फ़ीसदी एशिया के अन्य देशों की तरह श्रीलंका की
लोग डच भाषा। आबादी में भी कई जातीय समहू ों के लोग
अल्पसखं ्यक फ़्रेंच-भाषी लोग तल
ु नात्मक हैं। सबसे प्रमखु सामाजिक समहू सिंहलियों
रूप से ज़्यादा समृद्ध और ताकतवर रहे हैं। का है जिनकी आबादी कुल जनसंख्या
बहुत बाद में जाकर आर्थिक विकास और की 74 फ़ीसदी है। फिर तमिलों का नंबर
शिक्षा का लाभ पाने वाले डच-भाषी लोगों आता है जिनकी आबादी कुल जनसंख्या
को इस स्थिति से नाराज़गी थी। इसके चलते में 18 फ़ीसदी है। तमिलों में भी दो समहू
1950 और 1960 के दशक में फ़्रें च और हैं – श्रीलंकाई मलू के तमिल (13 फ़ीसदी)

बेल्जियम के
समुदाय और क्षेत्र




एथनीक या जातीय : ऐसा
विकीपीडिया




सामाजिक विभाजन जिसमें हर
समहू अपनी-अपनी संस्कृति को
अलग मानता है यानी यह साझी
लोकतांत्रिक राजनीति




संस्कृति पर आधारित सामाजिक
विभाजन है। किसी भी जातीय ब्रूसेल्स-राजधानी क्षेत्र
समहू के सभी सदस्य मानते हैं
कि उनकी उत्पत्ति समान पर्वू जों वेलोन (फ़्रेंच-भाषी)
से हुई है और इसी कारण उनकी
शारीरिक बनावट और संस्कृति फ्लेमिश (डच-भाषी)
एक जैसी है। ज़रूरी नहीं कि बेल्जियम और श्रीलंका के मानचित्रों को देख।ें इनके किस इलाके में
जर्मन-भाषी
ऐसे समहू के सदस्य किसी एक विभिन्न समदु ायों की सघन आबादी नज़र आ रही है?
धर्म के मानने वाले हों या उनकी
अधिक जानकारी के लिए, लॉग ऑन करें , https://www.belgium.be/en
राष्‍ट्रीयता एक हो।
2
Reprint 2026-27

, और हिदं सु ्तानी तमिल जो औपनिवेशिक अब ज़रा सोचिए कि ऐसी स्थिति में क्या
शासनकाल में बागानों में काम करने के लिए हो सकता था? बेल्जियम में डच-भाषी लोग
भारत से लाए गए लोगों की संतान हैं। मौजदू ा अपनी बड़ी सखं ्या के बल पर फ़्रें च-भाषी
श्रीलंका के नक्शे पर गौर करें तो पाएँगे कि और जर्मन-भाषी लोगों पर अपनी इच्छाएँ
तमिल मखु ्य रूप से उत्तर और पर्ू वी प्रांतों थोप सकते थे। इससे उनके बीच की लड़ाई
में आबाद हैं। अधिकतर सिहं ली-भाषी लोग और बढ़ जाती। सभं व था इससे देश बँट जाता
बौद्ध हैं जबकि तमिल-भाषी लोगों में कुछ और ब्सरू ल्स
े पर दोनों पक्ष अपना-अपना दावा
हिदं ू हैं और कुछ मसु लमान। श्रीलंका की ठोकते। श्रीलकं ा में सिहं ली आबादी का बहुमत
आबादी में ईसाई लोगों का हिस्सा 7 फ़ीसदी और ज़्यादा था और वे लोग मल्क ु में अपनी
है और वे सिंहली और तमिल, दोनों भाषाएँ मनमानी चला सकते थे। आइए, अब यह देखें
बोलते हैं। कि असल में दोनों देशों में क्या-क्या हुआ?


श्रीलंका में बहुसख
ं ्यकवाद
सन् 1948 में श्रीलंका स्वतंत्र राष्‍ट्र बना। उन्हें समान राजनीतिक अधिकारों से वचिं त
सिंहली समदु ाय के नेताओ ं ने अपनी बहुसंख्या कर रही हैं। नौकरियों और फ़ायदे के अन्य
के बल पर शासन पर प्रभतु ्व जमाना चाहा। कामों में उनके साथ भेदभाव हो रहा है और
इस वजह से लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित उनके हितों की अनदेखी की जा रही है।
सरकार ने सिंहली समदु ाय की प्रभतु ा कायम परिणाम यह हुआ कि तमिल और सिंहली
करने के लिए अपनी बहुसंख्यक – परस्ती के समदु ायों के संबंध बिगड़ते चले गए।
तहत कई कदम उठाए।
श्रीलंका के
1956 में एक काननू बनाया गया जिसके जातीय समुदाय
तहत तमिल को दरकिनार करके सिहं ली को
एकमात्र राजभाषा घोषित कर दिया गया।
विश्‍वविद्यालयों और सरकारी नौकरियों में
सिंहलियों को प्राथमिकता देने की नीति भी
चली। नए संविधान में यह प्रावधान भी किया
गया कि सरकार बौद्ध मत को संरक्षण और
बढ़ावा देगी।
एक-एक करके आए इन सरकारी फ़ै सलों
ने श्रीलंकाई तमिलों की नाराज़गी और शासन
को लेकर उनमें बेगानापन बढ़ाया। उन्हें लगा
सत्ता की साझेदारी


बहुसखं ्यकवाद : यह मान्यता
कि बौद्ध धर्मावलंबी सिंहलियों के नेततृ ्व कि अगर कोई समदु ाय
वाली सारी राजनीतिक पार्टियाँ उनकी भाषा बहुसंख्यक है तो वह अपने
मनचाहे ढंग से देश का शासन
और संस्कृति को लेकर असंवेदनशील हैं। उन्हें कर सकता है और इसके लिए
लगा कि संविधान और सरकार की नीतियाँ वह अल्पसंख्यक समदु ाय
की ज़रूरत या इच्छाओ ं की
अधिक जानकारी के लिए, लॉग ऑन करें , https://www.gov.lk अवहेलना कर सकता है।

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