Revision Notes for Class 11 Hindi (Aroh)
Chapter 1 – नमक का दारोगा
लेखक के बारे में
प्रेमचंद (1880-1936) हिन्दी और उदद ू साहित्य के एक मिान ले खक थे । उनकी किाहनयााँ और
उपन्यास भारतीय समाज की समस्याओं और जीवन की सच्चाइय ं क बारीकी से हचहित करते िैं ।
प्रेमचंद की ले खनी में समाज के िर वर्ू की समस्याओं की र्िरी समझ और संवेदनशीलता झलकती
िै , हजससे उनकी रचनाएाँ आज भी प्रासं हर्क और प्रभावशाली िैं ।
❖ कहानी के संक्षिप्त क्षििरण
किानी में पंहित अल पीदीन और मंशी वंशीधर के बीच धन और धमू का संघर्ू प्रमख िै । वंशीधर एक
ईमानदार अहधकारी िैं , ज भ्रष्टाचार से जदझते हुए पंहित अल पीदीन क हर्रफ्तार कर दे ते िैं । इसके
बावजद द, पंहित जी अपने धन के बल पर वं शीधर क नौकरी से हनकाल दे ते िैं । अंततः , पंहित जी
वंशीधर की ईमानदारी क स्वीकार कर उन्हें अपनी सम्पहि का स्थायी मैनेजर हनयक्त करते िैं ।
❖ मुख्य क्षिषय
‘नमक का दार र्ा’ की प्रमख थीम धन और धमू का संघर्ू िै । यि किानी बताती िै हक कैसे एक
ईमानदार और कतूव्यहनष्ठ व्यक्तक्त अं ततः धमू की हवजय प्राप्त करता िै , भले िी धन की ताकत के
सामने प्रारं भ में उसे पराहजत ि ना पडा ि ।
❖ पात्र क्षित्रण
मुंशी िंशीधर: किानी के नायक, एक ईमानदार और कतूव्यहनष्ठ अहधकारी िैं । उन्ह न ं े अपनी
ईमानदारी और धमू के प्रहत हनष्ठा के चलते पंहित अल पीदीन क हर्रफ्तार हकया और अंततः उनके
द्वारा नौकरी से हनकाले जाने के बावजद द, उनकी अच्छाई की सरािना की र्ई।
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Chapter 1 – नमक का दारोगा
लेखक के बारे में
प्रेमचंद (1880-1936) हिन्दी और उदद ू साहित्य के एक मिान ले खक थे । उनकी किाहनयााँ और
उपन्यास भारतीय समाज की समस्याओं और जीवन की सच्चाइय ं क बारीकी से हचहित करते िैं ।
प्रेमचंद की ले खनी में समाज के िर वर्ू की समस्याओं की र्िरी समझ और संवेदनशीलता झलकती
िै , हजससे उनकी रचनाएाँ आज भी प्रासं हर्क और प्रभावशाली िैं ।
❖ कहानी के संक्षिप्त क्षििरण
किानी में पंहित अल पीदीन और मंशी वंशीधर के बीच धन और धमू का संघर्ू प्रमख िै । वंशीधर एक
ईमानदार अहधकारी िैं , ज भ्रष्टाचार से जदझते हुए पंहित अल पीदीन क हर्रफ्तार कर दे ते िैं । इसके
बावजद द, पंहित जी अपने धन के बल पर वं शीधर क नौकरी से हनकाल दे ते िैं । अंततः , पंहित जी
वंशीधर की ईमानदारी क स्वीकार कर उन्हें अपनी सम्पहि का स्थायी मैनेजर हनयक्त करते िैं ।
❖ मुख्य क्षिषय
‘नमक का दार र्ा’ की प्रमख थीम धन और धमू का संघर्ू िै । यि किानी बताती िै हक कैसे एक
ईमानदार और कतूव्यहनष्ठ व्यक्तक्त अं ततः धमू की हवजय प्राप्त करता िै , भले िी धन की ताकत के
सामने प्रारं भ में उसे पराहजत ि ना पडा ि ।
❖ पात्र क्षित्रण
मुंशी िंशीधर: किानी के नायक, एक ईमानदार और कतूव्यहनष्ठ अहधकारी िैं । उन्ह न ं े अपनी
ईमानदारी और धमू के प्रहत हनष्ठा के चलते पंहित अल पीदीन क हर्रफ्तार हकया और अंततः उनके
द्वारा नौकरी से हनकाले जाने के बावजद द, उनकी अच्छाई की सरािना की र्ई।
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