. Chapter-3 Kallu kumhar ki Unakoti
इस नाम से क्यों प्रसिद्ध है?
उत्तर:- उनाकोटी का अर्थ है एक करोड़ से एक कम। त्रिपुरा में एक जगह है ‘उनाकोटी’। इसके लिए एक दंतकथा है
कि कल्लू नाम के एक कुम्हार ने शिव के साथ रहने की प्रार्थना की। शिव ने शर्त रखी कि यदि एक रात में वह शिव की
एक करोड़ मूर्ति बना देगा तो वह शिव- पार्वती के साथ कैलास पर्वत जा सकेगा। कल्लू ने मूर्तिया बनाई परन्तु एक
मूर्ति रह गई और सुबह हो गई। कल्लू वही रह गया। तब से इसका नाम उनाकोटी पड़ गया।
2. पाठ के संदर्भ में उनाकोटी में स्थित गंगावतरण की कथा को अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर:- दंत कथा के अनुसार उनाकोटी में शिव की एक कोटि से एक कम मूर्तियाँ हैं। यहाँ पहाड़ी को काटकर शिव की
विशाल आधार मूर्तियाँ बनी हैं। यहाँ भगीरथ की प्रार्थना पर स्वर्ग से पृथ्वी पर गंगा के अवतरण को चित्रित किया गया
है कि वे गंगा को अपनी जटाओं में उलझा ले और लें और फिर धीरे -धीरे पृथ्वी पर बढ़ने दें। इससे गंगा का वेग घट
गया। यही गंगा भागीरथी कहलाई।
3. कल्लू कुम्हार का नाम उनाकोटी से किस प्रकार जुड़ गया?
उत्तर:- कहा जाता है कि कल्लू कुम्हार के कारण ही इस स्थान का नाम उनाकोटी पड़ा। वह शिव–पार्वती के साथ
कैलाश पर्वत पर जाना चाहता था। परन्तु शिव ने एक शर्त रखी कि उसे एक रात में शिव की कोटि (एक करोड़)
मूर्तियाँ बनानी होगी। कल्लू कैलाश पर जाने की धुन में मूर्तियाँ बनाने में जुट गया परन्तु जब मूर्तियाँ गिनी गईं तो एक
मूर्ति कम थी। शिव को उसे छुड़ाने का बहाना मिल गया तथा कल्लू कुम्हार वहीं रह गया।
4. ‘मेरी रीढ़ में एक झुरझुरी-सी दौड़ गई’ – लेखक के इस कथन के पीछे कौन-सी घटना जुड़ी है?
उत्र:- लेखक के इस कथन के पीछे यह घटना जुड़ी है कि लेखक त्रिपुरा में शूटिंग करने में व्यसत ।था उसे सी.आर.पी.एफ. के जवान सुरक्षा प्रदान कर रहे ।थे इन सुरक्षा कर्मियों ने लेखक का ध्यान निचली पहाडियों पर इरादतन रखे दो पत्थरों की तरफ ।खींचा ‘दो दिन पहले सेना एक जवान यहीं विद्रोहियों द्वारा मारा गया ’था यह सुनकर लेखक की रीढ़ में एक झुररी-सी दौड़ ।गई
5. त्रिपुरा ‘बहु धार्मिक समाज’ का उदाहरण कैसे बना?
उत्तर:- त्रिपुरा में लगातार बाहरी लोग आते रहे। इससे यह बहु धार्मिक समाज का उदाहरण बना है। यहाँ उन्नीस
अनुसूचित जन जातियाँ और विश्व के चार बड़े धर्मों का प्रतिनिधित्व है। यहाँ बौद्ध धर्म भी माना जाता है। अगरतला के
बाहरी हिस्से में एक सुदं र बौद्ध मंदिर है। यहाँ शिव की उपासना की जाती है।
इस नाम से क्यों प्रसिद्ध है?
उत्तर:- उनाकोटी का अर्थ है एक करोड़ से एक कम। त्रिपुरा में एक जगह है ‘उनाकोटी’। इसके लिए एक दंतकथा है
कि कल्लू नाम के एक कुम्हार ने शिव के साथ रहने की प्रार्थना की। शिव ने शर्त रखी कि यदि एक रात में वह शिव की
एक करोड़ मूर्ति बना देगा तो वह शिव- पार्वती के साथ कैलास पर्वत जा सकेगा। कल्लू ने मूर्तिया बनाई परन्तु एक
मूर्ति रह गई और सुबह हो गई। कल्लू वही रह गया। तब से इसका नाम उनाकोटी पड़ गया।
2. पाठ के संदर्भ में उनाकोटी में स्थित गंगावतरण की कथा को अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर:- दंत कथा के अनुसार उनाकोटी में शिव की एक कोटि से एक कम मूर्तियाँ हैं। यहाँ पहाड़ी को काटकर शिव की
विशाल आधार मूर्तियाँ बनी हैं। यहाँ भगीरथ की प्रार्थना पर स्वर्ग से पृथ्वी पर गंगा के अवतरण को चित्रित किया गया
है कि वे गंगा को अपनी जटाओं में उलझा ले और लें और फिर धीरे -धीरे पृथ्वी पर बढ़ने दें। इससे गंगा का वेग घट
गया। यही गंगा भागीरथी कहलाई।
3. कल्लू कुम्हार का नाम उनाकोटी से किस प्रकार जुड़ गया?
उत्तर:- कहा जाता है कि कल्लू कुम्हार के कारण ही इस स्थान का नाम उनाकोटी पड़ा। वह शिव–पार्वती के साथ
कैलाश पर्वत पर जाना चाहता था। परन्तु शिव ने एक शर्त रखी कि उसे एक रात में शिव की कोटि (एक करोड़)
मूर्तियाँ बनानी होगी। कल्लू कैलाश पर जाने की धुन में मूर्तियाँ बनाने में जुट गया परन्तु जब मूर्तियाँ गिनी गईं तो एक
मूर्ति कम थी। शिव को उसे छुड़ाने का बहाना मिल गया तथा कल्लू कुम्हार वहीं रह गया।
4. ‘मेरी रीढ़ में एक झुरझुरी-सी दौड़ गई’ – लेखक के इस कथन के पीछे कौन-सी घटना जुड़ी है?
उत्र:- लेखक के इस कथन के पीछे यह घटना जुड़ी है कि लेखक त्रिपुरा में शूटिंग करने में व्यसत ।था उसे सी.आर.पी.एफ. के जवान सुरक्षा प्रदान कर रहे ।थे इन सुरक्षा कर्मियों ने लेखक का ध्यान निचली पहाडियों पर इरादतन रखे दो पत्थरों की तरफ ।खींचा ‘दो दिन पहले सेना एक जवान यहीं विद्रोहियों द्वारा मारा गया ’था यह सुनकर लेखक की रीढ़ में एक झुररी-सी दौड़ ।गई
5. त्रिपुरा ‘बहु धार्मिक समाज’ का उदाहरण कैसे बना?
उत्तर:- त्रिपुरा में लगातार बाहरी लोग आते रहे। इससे यह बहु धार्मिक समाज का उदाहरण बना है। यहाँ उन्नीस
अनुसूचित जन जातियाँ और विश्व के चार बड़े धर्मों का प्रतिनिधित्व है। यहाँ बौद्ध धर्म भी माना जाता है। अगरतला के
बाहरी हिस्से में एक सुदं र बौद्ध मंदिर है। यहाँ शिव की उपासना की जाती है।