🔹 महिलाओं और परुु षों द्वारा यात्रा करने के अनेक कारण थे। जैसे कार्य की तलाश में,
प्राकृतिक आपदाओं से बचाव के लिए, व्यापारियों, सैनिकों, परु ोहितों और तीर्थ यात्रियों के रूप में
या फिर साहस की भावना से प्रेरितहोकर यात्राएं की गई।
प्राचीन दौर में यात्राएं करने में आने वाली समस्याएं : –
● लंबा समय
● सवि ु धाओं का अभाव
● समद्र ु ी लट
ु े रों का भय
● प्राकृतिक आपदाएं
● बीमारियां
● रास्ता भटकने का भय
भारत की यात्रा करने वाले मख्
ु य यात्री : –
● 10वीं सदी से 17वीं सदी तक तीन प्रमख
ु यात्री भारत में आये : –
🔸 अल-बिरूनी, जो ग्यारहवीं शताब्दी में उज़्बेकिस्तान से आया था, उसने किताब-उल-हिन्द
नामक ग्रंथ लिखा जो अरबी भाषा में था।
🔸 इब्न बततू ा, जो चौदहवीं शताब्दी में मोरक्को से आया था, उसने रिहला (यात्रा वत्तृ ) नामक
ग्रंथ लिखा जो अरबी भाषा में था।
🔸 फ्रांस्वा बर्नियर, जो सत्रहवीं शताब्दी में फ्रांसीसी आया था, उसने ट्रैवल्स इन द मगु ल
एम्पायर नामक ग्रंथ लिखा फ़्रेंच भाषा में
🔹 अलबरूनी तथा इब्नबततू ा के पदचिह्नों का अनसु रण करते हुए 1400 ई. से 1800 ई. के
मध्य कई लेखकों ने भारत की यात्रा की इन लेखकों में से सबसे प्रसिद्ध लेखकों में अब्दरु
रज़्ज़ाक समरकंदी जिसने 1440 के दशक में दक्षिण भारत की यात्रा की थी, महमद ू वली बल्खी,
जिसने 1620 के दशक में व्यापक रूप से यात्राएँ की थीं तथा शेख अली हाजिन जो 1740 के
दशक में उत्तर भारत आया था, शामिल हैं।
, अल-बिरूनी : –
🔹 अल-बिरूनी का जन्म आधनिु क उज़्बेकिस्तान में स्थित ख़्वारिज्म में सन ् 973 में हुआ था।
ख़्वारिज्म शिक्षा का एक महत्त्वपर्ण
ू केंद्र था। अल-बिरूनी सीरियाई, फारसी, हिब्र,ू संस्कृत आदि
भाषाओं का अच्छा ज्ञान रखता था।
🔹 वह बंधक के रूप में ग़ज़नी आया था पर धीरे-धीरे उसे यह शहर पसंद आने लगा और सत्तर
वर्ष की आयु में अपनी मत्ृ यु तक उसने अपना बाकी जीवन यहीं बिताया।
अल – बिरूनी भारत कैसे आया ? ( अल-बिरूनी की यात्रा ) : –
🔹 सल्ु तान महमदू गजनवी ने 1017 ई. में ख्वारिज्म पर आक्रमण किया। वह विद्वानों का
बहुत सम्मान करता था इसलिए ख्वारिज्म के कई विद्वानों एवं कवियों को अपने साथ अपनी
राजधानी गजनी ले आया, अल-बिरूनी भी उनमें से एक था।
🔹 गजनी में ही अल-बिरूनी की भारत के प्रति रुचि विकसित हुई। पंजाब के गजनवी साम्राज्य
का हिस्सा बनने के पश्चात ् उसने ब्राह्मण परु ोहितों एवं विद्वानों के साथ कई वर्ष व्यतीत किए
तथा संस्कृत, धर्म एवं दर्शन का ज्ञान प्राप्त किया। हालाँकि उसका यात्रा कार्यक्रम स्पष्ट नहीं है
फिर भी प्रतीत होता है कि उसने पंजाब और उत्तर भारत के कई हिस्सों की यात्रा की थी।
किताब-उल-हिन्द : –
🔹अल-बिरूनी ने अरबी भाषा में लिखित ”किताब-उल-हिन्द” नामक पस्ु तक की रचना की इसकी
भाषा सरल व स्पष्ट है । यह ग्रन्थ 80 अध्यायों में विभाजित है जिनमें धर्म और दर्शन, त्योहारों,
खगोल विज्ञान, कीमिया, रीति-रिवाजों तथा प्रथाओं, सामाजिक जीवन, भार- तौल तथा मापन
विधियों, मर्ति
ू कला, कानन ू , मापतंत्र विज्ञान आदि विषयों का वर्णन है ।
अल – बिरूनी के लेखन कार्य की विशेषताएँ : –
🔹 अपने लेखन कार्य में उसने अरबी भाषा का प्रयोगकिया । अल बिरूनी संस्कृत, पाली तथा
प्राकृत ग्रंथों के अरबी भाषा में अनव
ु ादों तथा रूपांतरणों से परिचित था। इनमें दं तकथाओं से लेकर
खगोल विज्ञान और चिकित्सा संबध ं ी कृतियों भी शामिल थी ।