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Class notes

11th Hindi notes

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14
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11-10-2025
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2024/2025

Here is the notes of std 11th . This includes basic class notes of std 11th. This document is very helpful, most of the questions are asked in exams from these notes. It's in very simple and understanding language. You must grab this opportunity, don't miss.

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Bihar Board 11th Hindi Subjective Answers
प Chapter 7 तोड़ती प थर (सूयकांत ि पाठी िनराला)
तोड़ती प थर पाठ्य पु तक के एवं उनके उ र
1.
प थर तोड़नेवाली ी का प रचय किव ने िकस तरह िकया है?
उ र-
तोड़ती प थर वाली मजदू रन एक साँवली कसे बदन वाली यवु ती है। वह िचलिचलाती गम क धपू म हथौड़े से
इलाहाबाद क सड़क के िकनार एक छायाहीन वृ के नीच प थर तोड़ रही है। उसके माथे से पसीने क बदूं े दल
ु क रही ह।
मजदू रन अपने म-सा य काम म पूण त मयता से य त है।
2.
याम तन, भर बंधा यौवन,
नत नयन, ि य-कम-रत मन’
िनराला ने प थर तोड़ने वाली ी का ऐसा अक ं न य िकया है? आपके िवचार से ऐसा िलखने क या साथकता है?
उ र-
सयू का त ि पाठी ‘िनराला’ ने अपनी ‘तोड़ती प थर’ शीषक किवता म एक मजदरू नी के प एवं काय का िच ण िकया
है, जो साँवली और जवान है तथा आँखे नीचे झकु ाए पणू त मयता एवं िन ा से अपने काय म य त है।
किव ने उ प थर वाली ी के िवषय म इस कार िच इसिलए ततु िकया है िक प थर तोड़ने जैसे किठन का को
स पािदत करने के िलए सगु िठत व थ शरीर को होना िनता त आव यक है तथा सगु िठत शरीर ही मसा य काय हेतु
स म होता है। साथ ही ती ण धपू म शरीर का साँवला होना वाभािवक है। किव ने काय म उसक पूण त मयता का भी
सु दर िच ण िकया है। मेरे िवचार से ऐसा िलखना सवथा उिचत है।
3.
ी अपने गु हथौड़े से िकस पर हार कर रही है।
उ र-
ी (मजदू रन) अपने बड़े हथौड़े से समाज क आिथक िवषमता पर हार कर रही है। वह धपू क झल ु साने वाली भीषण
गम के क दायक प रवेश मे प थर तोड़ने का काय कर रही है। उसके सामने ही अमीर को सखु -सिु वधा दान करने
वाली िवशाल अ ािलकाएँ खड़ी ह जो उसक गरीबी पर यं य करती तीत होती ह। एक ओर उस ी के मािमक तथा
कठोर सघं ष क यथा-कथा है, दसू री ओर अमीर क िवशाल अ ािलकाओ ं एवं सख ु सिु वधाओ ं का िच ण है।
इस कार ततु पिं देश क आिथक िवषमता का सजीव िच ण है। इसके साथ ही इस िवषमता पर एक चभु ता यं य
भी है।
4.
किव को अपनी ओर देखते हए देखकर ी सामने खड़े भवन क ओर देखने लगती है, ऐसा य ?
उ र-
किव को अपनी ओर देखते हए देखकर ी सामने खड़े भवन क ओर देखने लगती है। वह प थर तोड़ना बदं कर देती है।
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, वह सामने खड़े िवशाल भवन क ओर देखने लगती है। ऐसा कर वह समाज म या आिथक िवषमता क ओर संकेत
करती है। किव उसके भाव को समझ जाता है।
5.
‘िछ नतार’ का या अथ है? किवता के संदभ म प कर।
उ र-
किववर सयू का त ि पाठी िनराला ने ‘तोड़ती प थर’ शीषक किवता म प थर तोड़ने वाली गरीब मजदरू नी क मािमक एवं
दा ण ि थित का यथाथ वणन ततु िकया है। किव प थर तोड़ती मजदरू नी को सहानभु ूितपणू ि से देखता है। वह भी
किव को एक ण के िलए देखती है। वह सामने के भ य भवन को भी देख लेती है और िफर अपने काय म लग जाती है।
उसक िववशता ऐसी है मान कोई यि मार खाकर भी न रोए। वह चाहकर भी अपनी यथा और िववशता किव क
दय-वीणा के तार को िछ न-िभ न कर देती है।
6.
‘देखकर कोई नह
देखा मझु े उस ि से
जो मार खा रोई नह ,
इन पिं य का मम उ ािटत कर।
उ र-
ततु पिं याँ महा ाण “िनराला’ रिचत ‘तोड़ती प थर’ किवता से उ त ह। इन पिं य म किव ने शोषण और दमन पर
पलती यव था के अ याय और वंचनापणू यहू म िपसती हई प थर तोड़ने वाली गरीब मजदरू नी का मािमक ि थित को
वणन िकया है। किव प थर तोड़ती मजदरू नी पर सहानभु ूित पूण नजर डालता है। वह भी एक िणक ि से किव क ओर
देखकर अपने काम म इस कार म न हो जाती है जैसे उसने किव को देखा ही नह ।
वह सामने िवशाल अ ािलका पर भी नजर डालकर समाज म या अमीरी-गरीबी क खाई से भी किव को -ब
कराती है। उसक नजर म सघं षपणू दीन-हीन जीवन का अ स सहज ही ि गोचर होता है। उसक िववशता ऐसी है
मानो कोई मार खाकर भी न रोए। सामािजक िवषमता का दश
ं मक
ू होकर सहने को गरीब मजदरू नी अिभश है।
7.
सजा सहज िसतार सनु ी मने वह नही जो थी सनु ी झक
ं ार’ यहाँ िकस िसतार क ओर सक
ं े त है? इन पिं य का भाव प
कर।
उ र-
ततु पंि याँ किववर ‘िनराला’ रिचत ‘तोड़ती प थर’ किवता क ह। किव इलाहाबाद के जनपथ पर भीषण गम म
प थर तोड़ती मजदरू नी को देखता है। वह भी िववश ि से किव को एक ण के िलए चपु चाप देख लेती है। िफर, अपने
काय म लग जाती है। वह कुछ बोलती नह , िफर भी किव उसके दय िसतार से झंकृत वेदना क मािमकता को समझ ही
लेता है।
किव मजदरू नी के दय िसतार से झक
ं ृ त वेदना जो सामािजक िवषमता क कहानी कहती हई तीत होती है, को दशाना
चाहता है। किव सहज अपने दय के वीणा के तार से उस शोषण क ितमिू त मजदरू नी के दय के तार से जोड़कर
उसके दा ण- यथा क अनभु िू त कर लेता है।

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Institution
Secondary school
Course
School year
1

Document information

Uploaded on
October 11, 2025
Number of pages
14
Written in
2024/2025
Type
Class notes
Professor(s)
Zeenat khan
Contains
11th

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