NCERT Solutions for Class 11
Hindi
Chapter 20 आओ, मिलकर बचाएँ
11:1:20: - प्रश्न- अभ्यास- कमिता के साथ
1.िाटी का रं ग प्रयोग करते हुए मकस बात की ओर संकेत मकया गया है ?
उत्तर: कवयित्री ने ‘माटी के रं ग’ शब्दं का प्रिदग अपनी अस्मिता कद बचाए और अपनी मूल पहचान
कद बनाए रखने के यलए यकिा गिा है । इस कयवता में कवयित्री क्षे त्रीि संथालदं के लदक जीवन की
महत्ता कद बताती है । वे उनकी स्वाभायवक सम्वे दनाओं कद (सादगी, मासूयमित, प्रकृयत के प्रयत
लगाव), शहरीकरण के आवरण से दू र रखने की ओर इशारा करती हैं । यजस प्रकार शहरी सं स्कृयत ने
अनेक संस्कृयतिदं की कब्दं के ऊपर, अपनी इमारत खड़ी की है । वे नहीं चाहती हैं , यक जद वततमान में
संस्कृयत शे ष है , वद भी कब् में बंद न हद।
2.भाषा िें झारखंडीपन से क्या अमभप्राय है?
उत्तर: कवयित्री का भाषा में झारखंडीपन से अयभप्राि उन आयदवासी समू ह की मातृ भाषा से हैं ।
प्रत्येक आयदवासी समूह की अस्मिता और पहचान का मूल स्रदत, उसकी भाषा हदती है । इसी प्रकार
संथायलिदं की भाषा संथाल है । इस भाषा में झारखंड की पहचान झलकती है । उनकी भाषा से िह
पता लगता है , यक वे झारखंड के रहने वाले हैं । कवयित्री भाषा के इसी स्थानीि प्रिदग और
स्वाभायवक यवशे षताओं कद नष्ट हदने से बचाना चाहती है ।
3.मिल के भोलेपन के साथ-साथ अक्खड़पन और जुझारूपन को भी बचाने की आिश्यकता
पर क्यों बल मिया गया है ?
Class XI Hindi www.vedantu.com 1
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Chapter 20 आओ, मिलकर बचाएँ
11:1:20: - प्रश्न- अभ्यास- कमिता के साथ
1.िाटी का रं ग प्रयोग करते हुए मकस बात की ओर संकेत मकया गया है ?
उत्तर: कवयित्री ने ‘माटी के रं ग’ शब्दं का प्रिदग अपनी अस्मिता कद बचाए और अपनी मूल पहचान
कद बनाए रखने के यलए यकिा गिा है । इस कयवता में कवयित्री क्षे त्रीि संथालदं के लदक जीवन की
महत्ता कद बताती है । वे उनकी स्वाभायवक सम्वे दनाओं कद (सादगी, मासूयमित, प्रकृयत के प्रयत
लगाव), शहरीकरण के आवरण से दू र रखने की ओर इशारा करती हैं । यजस प्रकार शहरी सं स्कृयत ने
अनेक संस्कृयतिदं की कब्दं के ऊपर, अपनी इमारत खड़ी की है । वे नहीं चाहती हैं , यक जद वततमान में
संस्कृयत शे ष है , वद भी कब् में बंद न हद।
2.भाषा िें झारखंडीपन से क्या अमभप्राय है?
उत्तर: कवयित्री का भाषा में झारखंडीपन से अयभप्राि उन आयदवासी समू ह की मातृ भाषा से हैं ।
प्रत्येक आयदवासी समूह की अस्मिता और पहचान का मूल स्रदत, उसकी भाषा हदती है । इसी प्रकार
संथायलिदं की भाषा संथाल है । इस भाषा में झारखंड की पहचान झलकती है । उनकी भाषा से िह
पता लगता है , यक वे झारखंड के रहने वाले हैं । कवयित्री भाषा के इसी स्थानीि प्रिदग और
स्वाभायवक यवशे षताओं कद नष्ट हदने से बचाना चाहती है ।
3.मिल के भोलेपन के साथ-साथ अक्खड़पन और जुझारूपन को भी बचाने की आिश्यकता
पर क्यों बल मिया गया है ?
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